बंगाल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू CM ममता बनर्जी पर हुईं नाराज, कहा- कुछ लोग नहीं चाहते कि…


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बंगाल में कार्यक्रम की जगह बदले जाने पर नाराजगी जताई. राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पहले से तय स्थान को बदल दिया गया था क्योंकि वहां बहुत भीड़ थी. देश के स्वतंत्रता संग्राम में संथाल समुदाय के योगदान को पर्याप्त मान्यता नहीं मिली है और समुदाय से जुड़ी कई महान हस्तियों के नाम ‘‘इतिहास में जानबूझकर शामिल नहीं किए गए. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है बंगाल सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती है. ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं. मैं भी बंगाल की बेटी हूं.’

कुछ लोग नहीं चाहते कि संथाल मजबूत बनें: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार (7 मार्च 2026) को दार्जिलिंग जिले में सिलीगुड़ी के बिधाननगर में नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन का उद्घाटन किया और संथाल बच्चों के लिए शिक्षा की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ‘मैं जानती हूं कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में संथालों का कितना योगदान रहा है, लेकिन संथाल महानायकों के नाम इतिहास में जानबूझकर शामिल नहीं किए गए. कुछ लोग नहीं चाहते कि संथाल एकजुट हों, प्रगति करें, शिक्षित हों…कुछ लोग नहीं चाहते कि संथाल मजबूत बनें. हालांकि, मैं जानती हूं कि संथालों ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है.’

ममता बनर्जी को लेकर क्या बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू?

बंगाल में कार्यक्रम की जगह पर राष्ट्रपति ने कहा, ‘अगर यह कार्यक्रम बिधाननगर में होता तो बेहतर होता. वहां काफी जगह है और बहुत से लोग आ सकते थे. मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां मीटिंग की इजाजत क्यों नहीं दी. फांसिदेवा में जहां यह कार्यक्रम तय किया गया वो मैदान काफी छोटा था, जिस वजह से कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके. उन्होंने कहा, ‘नॉर्थ बंगाल दौरे पर न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई राज्य मंत्री मुझे रिसीव करने आया. मुझे नहीं पता कि ममता मुझसे नाराज हैं या नहीं. वैसे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.’

राष्ट्रपति ने समुदाय से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि नई पीढ़ी को उचित स्कूली शिक्षा मिले. उन्होंने कहा, ‘मैं चाहती हूं कि संथाल समुदाय के सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले और इससे वे आत्मनिर्भर और अधिक मजबूत बनेंगे.’ राष्ट्रपति ने कहा कि अवसरों का विस्तार करने के लिए समुदाय को ‘ओल चिकी’ के अलावा अन्य भाषाएं भी सीखनी चाहिए.



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