धार में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस पर पथराव, TI घायल, BJP विधायक की बहू के नाम है विवादित जमीन


मध्य प्रदेश के धार जिले में शनिवार (7 मार्च) सुबह अतिक्रमण हटाने गई प्रशासनिक और पुलिस की संयुक्त टीम पर ग्रामीणों ने उग्र हमला कर दिया. धामनोद थाना क्षेत्र के गुजरी स्थित सिरसोदिया गांव में हुई इस घटना में धामनोद थाना प्रभारी (TI) और एक महिला पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं. ग्रामीणों के भारी पथराव में तहसीलदार के सरकारी वाहन के शीशे भी चकनाचूर हो गए. विवादित जमीन के तार स्थानीय बीजेपी विधायक से जुड़े होने के कारण मामला और गरमा गया है.

शनिवार (7 मार्च) सुबह करीब 10 बजे राजस्व विभाग और पुलिस की टीम न्यायालय के आदेश पर सिरसोदिया गांव में संतोष नामक व्यक्ति का अतिक्रमण हटाने पहुंची थी. प्रशासनिक टीम ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, ग्रामीणों ने तीखा विरोध करते हुए पथराव कर दिया. हमले में धामनोद थाना प्रभारी प्रवीण ठाकरे और एक महिला पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए धामनोद अस्पताल भेजा गया. घटना के बाद कुछ देर के लिए हाईवे पर भी आवागमन बाधित रहा. स्थिति को संभालने के लिए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.

70 साल पुराना कब्जा

इस पूरे विवाद के पीछे स्थानीय राजनीति और रसूख की बात भी सामने आ रही है:

  • कब्जाधारी का दावा: अतिक्रमणकारी संतोष का कहना है कि उसका परिवार 70-80 वर्षों से इस जमीन पर रह रहा है और पहले कभी हटाने की कार्रवाई नहीं हुई. उसने आरोप लगाया कि करीब डेढ़ साल पहले क्षेत्रीय बीजेपी विधायक कालू सिंह ठाकुर ने अपनी बहू पल्लवी ठाकुर के नाम से यह जमीन खरीदी थी, जिसके बाद से ही उन्हें बेदखल करने का दबाव बनाया जा रहा है.
  • विधायक का वायरल वीडियो: इसी जमीन पर रास्ते को लेकर पूर्व में भी बीजेपी विधायक कालू सिंह ठाकुर का कुछ महिलाओं से विवाद हुआ था. उस दौरान महिलाओं के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए विधायक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था.

कई सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त

एएसपी (ASP) विजय डावर और मनावर एसडीएम (SDM) प्रमोद सिंह गुर्जर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. एएसपी ने बताया कि अज्ञात उपद्रवियों द्वारा किए गए पथराव में सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं. पथराव करने वालों की पहचान कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

धामनोद तहसीलदार कृष्णा पटेल ने स्पष्ट किया कि कोर्ट का फैसला जमीन मालिक के पक्ष में आया था. हालांकि, आगामी त्योहार को देखते हुए प्रशासन ने अतिक्रमणकारी परिवार को जगह खाली करने के लिए 2 से 3 दिन की मोहलत दे दी है. फिलहाल गांव में स्थिति शांतिपूर्ण लेकिन तनावपूर्ण बनी हुई है.



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