
मुगल बादशाह अकबर का शासनकाल विस्तार और सुधारों के लिए जाना जाता है, लेकिन उनके जीवन के अंतिम दिन भारी व्यक्तिगत दुख और शारीरिक पीड़ा से भरे थे. 15 अक्टूबर 1542 को जन्मे अकबर ने अपने अंतिम समय में अपने सबसे करीबियों को खोते देखा है.

उनके प्रिय नवरत्न बीरबल की हत्या कबायली विद्रोह में हो गई, जबकि उनके बेटे मुराद और दानियाल की अत्यधिक शराब पीने के कारण कम उम्र में ही मृत्यु हो गई. रही-सही कसर उनकी माता हमीदा बानो बेगम के निधन ने पूरी कर दी, जिन्होंने 29 अगस्त 1604 को दुनिया को अलविदा कहा. इन मौतों के सदमे ने अकबर के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला.
Published at : 06 Mar 2026 07:36 PM (IST)
