3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. भारत में दृश्य होने के कारण इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व काफी अधिक है. दिल्ली के प्रसिद्ध प्राचीन हनुमान मंदिर (कनॉट प्लेस) के महंतों के अनुसार, यह ग्रहण न केवल खगोलीय घटना है, बल्कि इसका सूतक काल देशभर के मंदिरों और जनजीवन को प्रभावित करेगा.
महंत सुमित शर्मा ने बताया कि ग्रहण का कुल समय दोपहर 3:20 से शाम 6:47 तक रहेगा. हालांकि, दिल्लीवासियों को यह अद्भुत नजारा बेहद कम समय के लिए दिखेगा. दिल्ली में ग्रहण केवल शाम 6:20 से 6:26 तक (कुल 6 मिनट) ही दृश्य होगा.
सूतक काल: सुबह 6:20 से पाबंदियां
चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है.
- सूतक प्रारंभ: सुबह 6:20 बजे से.
- मंदिर की व्यवस्था: सूतक लगते ही फूलों की माला और प्रसाद चढ़ाना बंद हो जाएगा.
- कपाट बंदी: सुबह 9:20 बजे मंदिर के कपाट पूर्ण रूप से बंद कर दिए जाएंगे, जो ग्रहण समाप्ति के बाद आरती और शुद्धि के बाद ही खुलेंगे.
गर्भवती महिलाओं और स्वास्थ्य पर प्रभाव
ज्योतिषियों और पंडितों ने चेतावनी दी है कि यह ग्रहण स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है:
- गर्भवती महिलाएं: ग्रहण काल में घर से बाहर निकलने से बचें, ताकि शिशु पर बुरा प्रभाव न पड़े.
- बीमारियां: सर्दी, जुकाम, निमोनिया और ब्लड प्रेशर के मरीजों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
- राशियां: कर्क राशि (चंद्रमा स्वामी होने के कारण) और सिंह राशि वालों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है.
क्या करें और क्या न करें?
- जाप: ग्रहण के दौरान ‘ओम नमः शिवाय’ या इष्ट देव का मानसिक जाप करें.
- दान: ग्रहण समाप्त होने के बाद ही दान-पुण्य करना फलदायी माना जाता है.
- शुद्धि: ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करें, मूर्तियों को स्नान कराएं और वस्त्र बदलें.
- विशेष नोट: स्वयंभू विग्रहों (जैसे प्राचीन हनुमान मंदिर की मुख्य मूर्ति) पर ग्रहण का दोष नहीं लगता, लेकिन परंपरा के अनुसार कपाट बंद रखे जाते हैं.
2026 के अन्य ग्रहण
पंडितों के अनुसार, 2026 में कुल तीन ग्रहण लगेंगे, जिनमें से केवल यही पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा. शेष दो ग्रहण विदेशों में प्रभावी रहेंगे और भारत में अदृश्य होंगे.
