भारत और इजरायल ने गुरुवार (26 फरवरी) को इस बात पर सहमति जताई कि अगले पांच वर्षों में 50,000 तक अतिरिक्त भारतीय कामगार इजरायल जाकर नौकरी कर सकते हैं. ये फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बैठक में लिया गया है. इसका मतलब ये है कि इजरायल हर साल औसतन करीब 10 हजार और भारतीयों को अपने यहां नौकरी के अवसर देगा.
दोनों प्रधानमंत्रियों ने इजरायल में भारतीय कामगारों के योगदान को स्वीकार किया, जो अपने काम के जरिए दोनों देशों की दोस्ती को बढ़ाने में अहम योगदान दे रहे हैं. भारत और इजरायल ने निर्माण और देखभाल क्षेत्रों में भारतीय कामगारों की सुरक्षित आवाजाही को सुगम बनाने के लिए नवंबर 2023 में हस्ताक्षरित फ्रेमवर्क समझौते और कार्यान्वयन प्रोटोकॉल के महत्व को स्वीकार किया.
अभी कितने भारतीय इजरायल में जॉब कर रहे हैं
द इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण और देखभालकर्ता क्षेत्रों से संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने का दोनों नेताओं ने स्वागत किया. बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, वाणिज्य एवं सेवा, मैन्युफैक्चरिंग और रेस्तरां क्षेत्रों से संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने का भी दोनों नेताओं ने स्वागत किया है.
अगस्त 2025 तक इज़रायल में 20,000 से अधिक भारतीय नागरिक कार्यरत हैं, जिनमें से कई निर्माण और देखभाल क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी को पूरा करने के लिए आ रहे हैं. इजरायल दौरे के दौरान पीएम मोदी ने अपनी रवानगी से पहले भारतीय प्रवासी भारतीयों से भी मुलाकात की.
डेटा साइंस और एआई में भी भारतीय कामगारों को मिलेगा मौका
दोनों प्रधानमंत्रियों ने श्रमिकों की सुरक्षा, संरक्षा और कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने डेटा साइंस, एआई और हाई-टेक जैसे उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों के लिए अवसरों का विस्तार करने के महत्व पर भी बल दिया. दोनों नेताओं ने संयुक्त समन्वय समिति के कार्यों की समीक्षा की और जेसीसी को श्रमिकों से संबंधित लंबित मुद्दों पर चर्चा करने और उन्हें जल्द से जल्द हल करने के लिए नियमित बैठकें करने का निर्देश दिया.
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