यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी एक्टिव, दिल्ली में बड़ी बैठक, 6 महीने का रोडमैप होगा तैयार!


उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसको लेकर कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज एक अहम रणनीतिक बैठक की, जिसमें राज्य की संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा हुई.

बैठक में उत्तर प्रदेश प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, अल्पसंख्यक कांग्रेस के राष्ट्रीय चेयरमैन इमरान प्रतापगढ़ी, ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय चेयरपर्सन अनिल जयहिंद और अनुसूचित कांग्रेस के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम मौजूद रहे.

6 महीने का रोडमैप तैयार

सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश के लिए एक विस्तृत छह महीने का रोडमैप तैयार कर रही है. इस रणनीति का मुख्य आधार राज्यभर में ‘सामाजिक न्याय कार्यक्रम’ की शुरुआत करना होगा. इस पहल के तहत पार्टी ब्लॉक स्तर पर सामाजिक संपर्क और जनसंवाद कार्यक्रम शुरू करेगी, ताकि जमीनी स्तर पर समुदायों से सीधा संवाद स्थापित किया जा सके. अभियान के दौरान जमीन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा, जिसमें भूमि अधिकार और सामाजिक समानता के सवाल शामिल होंगे.

संगठन में भी दिखे सामाजिक न्याय: राहुल गांधी

सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक न्याय केवल सार्वजनिक अभियान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पार्टी संगठन के ढांचे में भी दिखाई देना चाहिए. उन्होंने कहा कि संगठन में वंचित और हाशिए पर रहे समुदायों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है.

OBC, दलित, मुस्लिम और गरीब सामान्य वर्ग पर फोकस

सूत्रों के अनुसार, बैठक में उत्तर प्रदेश के सामाजिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा हुई. खास तौर पर ओबीसी, दलित और मुस्लिम मतदाताओं के बीच पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर विचार किया गया. साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग तक पहुंच बनाने की भी योजना बनाई जा रही है. कांग्रेस अब उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय को मुख्य एजेंडा बनाकर जमीनी स्तर पर सक्रिय अभियान शुरू करने की तैयारी में है. आने वाले महीनों में इन वर्गों तक सीधे पहुंच बनाने के लिए लक्षित कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई जा रही है.

ये बैठक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी सक्रियता की शुरुआती और संगठित तैयारी लिए थी, जिसमें सामाजिक न्याय को आगामी रणनीति का केंद्रीय मुद्दा बनाया गया है.



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