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आज, हम जासूस एजेंट्स की रोमांचक दुनिया और भारत के कुछ बेहतरीन सीक्रेट एजेंट्स के बारे में बात करते हैं. हमारी सभी सीक्रेट एजेंट्स के सामने भारतीय फिल्मे और कहानिया भी जैसे फीके पड़ जाते है. आज हम कुछ इसे ही भारतीय हीरो की बाते करते हैं.

हमारे जेम्स बांड्स

श्री अजीत डोवाल

इन बहादूर नायको में सब से पहले आज हम बात करेंगे आज तक के सब से प्रतीभावान एन.एस.ए श्री अजीत डोवाल जी की जो की एक आईपीएस अधिकारी भी हैं.  हमारे पहले जेम्स बांड श्री अजीत डोवाल फील्ड ऑफिसर बन कर करीब ७ साल पाकिस्तान में रहे हे.  दक्षिण भारत हमेशा से विद्रोहीयो का शिकार रहा हे बिलकुल कश्मीर की तरह.  जब डोवाल को मिजोरम में उपद्रवीयो के उत्पात के समय इसी क्षेत्र में पदस्थ किया गया था. जहाँ उन्होंने अपनी योग्यता और रुतवे का लोहा मनवाया. उन्होंने इस तरह से मामले को संभाला की विद्रोहियों के गुट के सभी नेता उनके मित्र बन गए. उनकी पत्नी उन विद्रोहियों के लिए खाना बनाती थी जिन्हें रात के खाने के लिए घर पर आमंत्रित किया जाता था।

यह दो से अधिक वर्षों के लिए चलता रहा एक दिन वह मिजोरम लिबरेशन आर्मी प्रमुख के साथ बातचीत करने के लिए जंगली क्षेत्र में गहरे चीन तक चले गए। उनके अधिकारी जब आश्चर्य चकित रह गए जब उन्होने देखा कि विध्रोइयो के सात प्रमुख कमांडरों में से छह डोवल के दोस्त थे । जब आप एक मिज़ोरेमी भी नहीं थे आपने अपनी योग्यता से विद्रोहियों को बदलने के लिए विवेश कर दिया.  कहते हैं कि उन्होंने एक बार दाऊद इब्राहिम की हत्या की योजना बनाई थी, लेकिन भारतीय पुलिस ने उनका ऑपरेशन खराब कर दिया।

२. श्री रामेश्वरनाथ काओ

हमारे दुसरे जेम्स बांड श्री रामेश्वरनाथ काओ एक ऐसे व्यक्ति थे जिसने अपने पूरे जीवनकाल में केवल दो बार सार्वजनिक रूप से फोटो खीचवाया था. वे एक ऐसे व्यक्ती थे जिन्होंने रों और एन एस जी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनके ऊपर पंडित जवाहरलाल नेहरु की व्यक्तिगत सुरक्षा की जुम्मेदारी सोंपी गयी थी. बहूत थोड़े से साधनों और संसाधनों से शुरू किया गया काओ का मिशन अपनी सफलताओं की ऊँची मंजीलो तक गया. रॉ ने बांग्लादेश की मुक्ति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, साथ ही साथ सिक्किम के विलय में, करीब 7000 वर्ग किलोमीटर से अधिक का क्षेत्र उनके प्रयासों से संप्रभु भारत में मिल पाया।  सी आई ए और मुसाद को छोड़ कर एसी कोई एजेंसी दुनिया में नहीं हे जिसने सात साल के छोटे से अंतराल में एसी उप्लाब्धिया हांसिल की हो.

उनके नेतृत्व में रॉ ने एक गरीमामई मुकाम प्राप्त किया. ऐसा भी कहा जाता हे की उन्होंने १९७१ के युद्ध में भारत की जीत में एक विशेष भूमिका निभाई थी. जब वे आई बी के चीफ थे तब उन्होंने अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस  के सपोर्ट में महत्वपुर्ण भूमिका निभाई थी और रंगभेद से लड़ने के लिए अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन किया।  संयोग से वह 1980 के दशक में मिजोरम के प्रभारी भी थे. संभवतः आर एन काओ अजीत डोवाल के गुरु रहे हे?

 

३. श्री रविन्द्र कोशिक

अब हम बात करते हमारे तीसरे जेम्स बांड एक और शेर की वह हे श्री रविन्द्र कोशिक.  श्री रवींद्र कौशिक एक पहुंचे हुवे कवर एजेंट थे। एक बड़ा कवर एजेंट संभवत: किसी भी इंटेलिजेंस बॉडी में सबसे मूल्यवान तत्त्व है। रविंद्र कौशिक को रॉ द्वारा प्रशिक्षित किया गया था और पाकिस्तान में लगाया गया था। इसका एक मतलब है कि उर्दू को पाकिस्तानियों की तरह आना चाहीये। उन्होंने एक पाकिस्तानी लड़की से शादी की और किसी तरह पाकिस्तानी सेना में एक मेजर की तरह जगह बना ली और पुरे समय पकिस्तानी सेना से संबंधीत बहुमूल्य जानकारिया उपलब्ध कराते रहे. एक बार रॉ ने उनकी मदद के लिये एक एजेंट भेजा जो की पकड़ लिया गया, जिसकी निशानदेही पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और दो साल तक अत्याधिक प्रताड़ित करने के बाद उन्हें म्रत्युदंड दे दिया गया.

४.  श्री मति सरस्वती राजामनी

हमारी अगली जेम्स बांड सरस्वती राजामनी, एक महीला थी जिसने एक आदमी के रूप में ड्रेसिंग द्वारा अंग्रेजों को मूर्ख बनाया।  सरस्वती राजामनी एक बहुत ही धनी परिवार की महिला थी. लेकिन उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को सपोर्ट करने के लिये अपना जीवन समर्पित कर दिया उन्होंने अपने गहने तक बेच दिए. वे जब सोलह साल की थी जब वे आईएनए में शामिल हो गयी थी.  वह और पांच अन्य लड़कियां लड़कों के भेष में तैयार हो गईं और ब्रिटिश सेना में शामिल हो गयी. ये सभी लडकिया ब्रिटिश मिलेटरी कैंपो में गृह सेवको के रूप में शामिल हो गयी और महत्वपुर्ण जानकारिया INA मुख्यालय को भेजती रही.

उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि अगर वे पकड़ी जाये तो उन्हें खुद को तुरंत शूट कर लेना है. एक लड़की को खुद को गोली मारने से पहले जिंदा पकड़ा गया था। सरस्वती राजामनी ने उसे बचाने का फैसला किया उसने खुद को ग्रुप से अलग कर लिया और शिविर में घुसपैठ कर दी और अंग्रेज अधिकारियों के कुछ करने से पहले ही उन्हें नशा दे दिया। फिर वह उस लकड़ी को साथ लेकर भाग गयी. ऐक ब्रिटिश अधिकारी ने उन्हें पैर में गोली मार दी, फिर भी वे भागने में सफल हो गयीउनका परिवार के पास स्वर्ण खदानों का स्वामित्व था फिर भी उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के लिए सब कुछ स्वाहा कर दिया।  हाल ही उन्हें जीवन निर्वाह के लिए भारतीय सरकार से पैसा स्वीकार करना पड़ा।

५.  श्री कश्मीर सिंह

हमारे चौथे जेम्स बांड श्री कश्मीर सिंह, जिन्होंने 35 साल पाकिस्तानी जेल में बिताया था. हर जासूस अपने लक्ष्य को सफलता तक पहूचा सके यह महत्वपूर्ण नहीं, महत्वपुर्ण यहाँ हे की उसने अपने प्रयासों में कोइ कमी तो नहीं राखी, वास्तव में उसके पीछे जो उनका देशभक्ति का त्याग और बलिदान का जज्बा होता हे वह महत्वपुर्ण होता है.  हर जासूसी की कहानी रोमांचकारी होती है बिलकुल डरावनी फिल्मो की तरह और कभी कभी प्रेरणादायक भी..  कश्मीर सिंह एक निचले दर्जे के ऑपरेटर थे जो एक अनुबंध के तहत काम करते थे।

इसका मतलब था कि वह एक स्थायी कर्मचारी नहीं थे, और इसलिए वास्तव में उन्हें उस समय उतना नाम नहीं मिला जिसके वह काबिल थे.  गुप्तचर होने के आरोप में वह पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी द्वारा पकडे गए उनपर जासूसी का मुकदमा चला था। उन्होंने अगले 35 साल जेल में बिताए।  इन 35 वर्षों में, उन्होंने एक कक्ष में सत्रह साल तक जंजीर में जकड़े रहे ।  ये पैतीस वर्ष उन्होंने बिना आकाश, दिन का उजाला और बीना आगंतुकों को देखकर बिताए  उन्होंने अपनी विवेक खो दिया और अत्याधिक पीड़ा सहने के बाद मानवतावादी आधार पर परवेज मुशर्रफ सरकार ने उन्हें माफ कर दिया। वे 2008 में भारत लौट आये.

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