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सीधे नुक्कड़ से :- नुक्कड़, किसी मोहल्ले का वो स्थान, जो हर किसी के घर से ‘सुविधाजनक’ दूरी पर स्तिथ है।  दुनिया की उहा-पोह  के साथ ताल से ताल मिलते हुए, शाम को मनुष्य एक तथाकथित वक्ता का रूप ले लेता है। “हुनरयुक्त” वक्तव्य को मंच देने का प्राचीनतम कार्य, सदियों से जो करता आया है, वो और कोई नहीं, नुक्कड़ ही है।

वो नुक्कड़ ही है जिसने कई सरकारों को खुली चेतवानी दी, लेकिन इतना दम नहीं भर पाया की उन्हें गिरा सके। किसी भी देश के बड़े से बड़े फैसले लेने का माद्दा या तो लोकसभा रखती है, या नुक्कड़। या फिर यह कह लो की लोकसभा, नुक्कड़ का extended version है।  वो version, जहाँ पर या तो चयनित होकर पंहुचा जाता है या फिर भाई-भतीजावाद की आड़ लिए। खैर, हमारा नुक्कड़ ऐसा नहीं है। लेकिन यहाँ पर भी दो चीज़े मायने रखती है। पहला ,की आप एक जटिल point of view लेकर पैदा हुए हैं , जिससे आपका किसी की बात पर सहमत होना असंभव है। दूसरा, की आप “वाह-वाह”, “क्या बात है” आदि का सतत अभ्यास करते है।

आज नुक्कड़ पर, दिन भर की थकान लिए १३ नंबर वाले गुप्ता जी और २१ नंबर वाले शुक्ल जी पहुंचे। थोड़ी ही देर में, अग्रवाल साहब, पंडित जी और युवा हृदय सम्राट, सोन्टू भिया भी पहुंचे। पप्पू पानवाले के ज़र्दे वाले पान को नमन करते हुए जब उन्होंने बीड़ा चबाया था, तो अंतरात्मा से पहला शब्द निकला, बजट ।  क्या रहा इस बार का बजट?  कुछ मिला मध्यम वर्ग को? ये बजट इस बार का सबसे बड़ा सरकार वित्त पोषित स्वास्थ बजट है? 5 लाख के insurance का premium कौन भरेगा? ये राहुल गांधी सो रहा था क्या भाषण की वक़्त ? सुना है आडवाणी जी ज़रा नाराज़ है बजट से?

इन्ही सवालों के बीच सबसे पहला जवाब आया, सबसे बुज़ुर्ग पंडित जी का। ” ये सरकार की चाल है, परिमियम हमसे ही भरवाएंगे। लेकिन फायदा किसी और वर्ग का होगा। ये सारे वोट बैंक की राजनीति करते है।  क्या सामान्य वर्ग गरीबी रेखा के नीचे नहीं आता?” पंडित जी की हर बात को सिरे से ख़ारिज करते हुए, शुक्ल जी बोले, ” देखो, कुछ भी बोलो, मोदी जी विकास तो कर रहे है। अगर आपको यकीन ना हो तो, तो इतिहास देख लो, आखिर क्या विकास हुआ पिछले 64 सालों में,क्या किया आपकी पिछली सरकारों ने ?”

इस तर्क-कुतर्क के बीच में कूदे अग्रवाल बोले, ” सीधी सी बात है, अगर 10 करोड़ जनता चाहती है की उनके घर का सेहत अच्छी रहे, तो प्रीमियम भरने में हर्ज़ ही की है?” अभी प्रीमियम की खिचड़ी पक ही रही थी तभी युवानेता सोन्टू जी ने आह्वान किया, ” अरे प्रीमियम कोई भी भरे, पर 2019 के चुनाव में, हर घर भगवा कर जायेंगे , मोदीजी दोबारा आएंगे ।”  गुप्ता जी की वाह वाह ने , अंततः सोन्टू की नेतागिरी को बल प्रदान किया।

वहाँ गुजर रही एक कार में एक अबला के साथ दुष्कर्म हो रहा था। उसी गुमटी के पास, भीख मांगती बुढ़िया, उस रात की ठण्ड से मर भी सकती है।  उस पप्पू पानवाले की बेटी कल स्कूल नहीं जा पायेगी क्योंकि तथाकथित बुद्धिजीवियों का ख़ाता, काले धन  को बाहर आने नहीं देगा।  इस 4 घंटे लम्बी, पूर्णतः तल्लीन बातचीत का परिणाम ये निकला। यहाँ मेरा सिर्फ एक छोटा सा सवाल है। अच्छे दिन कौन लाएगा ? हम या सरकार ?

सबको को याद गरीब आ रहा हैं,

लगता है चुनाव क़रीब आ रहा हैं… 

जय हिन्द।

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