Advertisement
सीधे नुक्कड़ से … मुश्किल है अपना मेल प्रिये? :- नुक्कड़, धरती पे पाए जाने वाली एक विलक्षण तथा प्रसिद्ध जगह। ये एक ऐसी जगह, जहाँ पर मुद्दे को ही पता नहीं की वो भी एक चर्चा का विषय है। ऐसा वैसा विषय नहीं, एक गहन अध्ययन वाला विषय। पीएचडी वाला। ऐसा विषय, जिसके चरमोत्कर्ष तक पहुँचते-पहुंचते शायद ये लेख ही मुझसे क्षमा याचना करने लगे, बस भाई, माफ़ कर दे ।  यहाँ पर एक प्रासंगिक प्रश्न ये उठता है की कौन-सा विषय नुक्कड़ पर सदैव Trending रहता है ? इस ‘वाक् स्थल’ (Speech Point) के मुख्य ‘वाकस्थल’ (Front Door) का ताला किस तरह के ‘वाक स्थल’ (Point of  View) रूपी कुंजी से हमेशा खुलेगा, ताकि ‘वाक्पटुता’ (eloquence) खुली हवा में सांस ले सके? प्रश्न कठिन है, व्याकरण के हिसाब से भी, परन्तु उत्तर बहुत सरल है। वो विषय जो हर नुक्कड़ पर, न्यूटन की थ्योरी तरह विद्यमान है, वो है, प्यार, इश्क़ और मोहब्बत

जो भी इनका नाम ले, ज़रा हिसाब से काम ले। क्योंकि अगर वो उस मोहल्ले में निवास करता है, जहाँ मंजू आंटी सतत् आपके घर की तरफ आँख गढ़ा कर बैठी रहती है, जहाँ शर्मा जी का तथाकथित विद्यवान गुणी आती चातुर लड़का पढ़ाई के नशे में घर से बाहर नहीं निकलता, तो मेरी सख़्त हिदायत है की इस स्तिथि में घर से बाहर न निकला जाए।  खासकर वैलेंटाइन वीक में तो कतई नहीं । shoot at sight लागू है। मोहल्ले में इश्क़ फरमान उतना ही कठिन है, जितना अच्छे दिन  लाना , क्योंकि मित्रों, हम बड़े-बड़े वादे तो कर लेते है, लेकिन…

खैर, अब आप सोच रहे होंगे की इन सब के बीच में नुक्कड़ क्या कर रहा है? ज्यादा तो कुछ नहीं, पर कहीं ना कहीं,  आपकी प्रेम कहानी के कथावाचक का किरदार निभा रहा है।  अब ज़रूरी नहीं है कि हर बार कथावाचक सिर्फ वो ही कहानी बाचे, जो आपके हिसाब से उपयुक्त हो। अगर 12 रूपए वाली सादी मैगी, इतनी ही स्वादिष्ट लगती, तो बड़े बड़े कैफ़े हाउस जनता की जेब के साथ मज़ाक नहीं करते। नुक्कड़, वो मिर्च-मसाला है, जो आपकी कहानी में ऐसा तड़का लगा रहा है, जिसे सुनने वाले चटकारे लेकर ग्रहण कर रहे है, पर ये तड़का आपकी ज़िन्दगी झुलसाने, बहुत झुलसने के लिए काफ़ी है।

नुक्कड़ पर आपके नाम इतने लोगों के साथ जोड़े जाते है, जितने तो आजकल फ़िल्मी सितारों का नहीं जुड़ते। आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते के नुक्कड़ पर फुरसतियाचंदो ने आपको , पिछली गली वाली सोनिया का प्रेमी करार दिया है।  वो भी इस आधार पर की आप उस मकान में रहते है जिसकी पीठ, सोनिया जी के मकान के साथ साझेदारी में है। शाम को खुली हवा में सांस लेकर किशोर दा के गाने गाना, इस बात का सूचक माना जा रहा है की आप प्रत्यक्ष रूप से सोनिया जी को लाइन मार रहे है।  नुक्कड़ पर इस बात की बोली लगाई जा रही है की आपको कितने दिन लगेंगे, सोनिया जी के साथ बात करने के लिए। इस  7 फरवरी से 14 फरवरी तक आपका गुलाब, चॉकलेट, टेड्डी (teddy) इत्यादि के साथ रंगे हाँथो पकडे जाना, IPC की धारा के तहत जुर्म-ए-आशिकी करार दिए जायेगा।  पिंक बुशर्ट इरादतन हत्या।

चलो ये तो बात हुयी नुक्कड़ के नज़रिये की।  पर इस हफ्ते, अगर सच में आप सोनिया जी नामक ऐप डाउनलोड करके इनस्टॉल करने की प्रक्रिया आरम्भ करना चाहते है, तो तैयार रहिये। ये मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा की वो सुरंग है, जिसके अंत में भी धुप की एक किरण नहीं है। रात का समय है इसीलिए। नुक्कड़ से ज्यादा नुकसान कुछ तथाकथित धर्मरक्षक दल, इतनी आसानी से करते है, जितनी आसानी से ‘किम जोंग उन’ अमेरिका को धमकी देता है। और उससे ज्यादा नुकसान करने का हक़ केवल एक व्यक्ति के पास है, वो है आपके अपने पिताजी। पिताजी से ये बात अवगत इसलिए होगी क्योंकि आपके पिताजी पान के फैन है। पप्पू पानवाले की दूकान, आखिरकार नुक्कड़ पर ही स्तिथ है।  नुक्कड़ हर समस्या की जड़ तथा समाधान है।

सुनील जोगी जी खूब कहते है,

एक पके आम सा लटका हूँ, मत मारो मुझे गुलेल प्रिये,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये… 

जय हिन्द।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here